चाबी _ Chapter 1

Chapter 1

सुबह के सात बजते ही रणवीर भट्ट के अलार्म की घंटी बज उठी हैं। Blinkit की होम डिलीवरी खत्म कर के वो रात 2 बजे घर आया था, और थका हारा 2:45 को सो गया था। 4 घंटे की छोटी सी नींद उसके स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं हैं, फिर भी दो पैसा कमाने के लिए, 6 लोगों के परिवार को दो वक्त की रोटी देने के लिए, पिछले पंद्रह दिनों से वो सिर्फ 4 घंटे सो रहा हैं। 

दिन में 16 से 17 घंटे वो होम डिलीवरी का काम कर रहा हैं, Zomato की सिस्टर कंपनी Blinkit में, एक डिलीवरी एजेंट की हैसियत से। सुबह को 8 से 10, फिर दोपहर को 12 से 3:30, और फिर शाम को 7 से रात के 2 बजे तक वो पूरे शहर में अपनी बाइक के ऊपर, ऑर्डर के हिसाब से होम डिलीवरी में जुटा हुआ हैं, तब जा के उसके हाथ में कुछ 25,000₹ आता हैं। मुंबई शहर के वसई इलाके में वो रहता हैं और 25,000 उसके परिवार के लिए बिल्कुल काफी नहीं हैं। आए दिन उसकी बीवी उसके पास ज्यादा पैसे मांगती रहती हैं _ कभी बच्चों की स्कूल फीस के लिए, कभी घर के राशन और किराए के लिए तो कभी उसके बुजुर्ग मां बाप की दवाई खर्च के लिए। ऐसे संजोग में उसके परिवार का गुज़ारा बहुत मुश्किल से हो रहा हैं। 

अभी 35 का ही हैं पर सूरत से अब वो 45 का दिखने लगा हैं। भविष्य की चिंता उसे खाए जा रही हैं: "न जाने मेरी बेटी  सुमन और बेटे मनन का क्या होगा? पैसों के बिना ये लोग क्या करेंगे? और इसमें भी अगर मुझे कुछ हो गया तो? तो मेरे इस परिवार को कौन संभालेगा?" ऐसे कई प्रश्न उसके दिमाग में पिछले दो महीनों से उठ रहे हैं। ये जीवन अब उसे एक बोज लगने लगा हैं।

"काश, कई से अचानक कोई लॉटरी लग जाए! काश कई से ढेर सारा पैसा मेरे हाथ आ जाए!" वो सोचता रहता हैं..."पर आखिर आयेगा कहां से? इस साली डिलीवरी एजेंट की नौकरी में तो मुश्किल से 25,000 आ रहे हैं। उसमें तो अब ज्यादा आने की कोई गुंजाइश नहीं हैं। रही बात ऑनलाइन गेम्स और शेर मार्केट की। वहां पर भी मैं खूब किस्मत आजमा चुका हूं। उसमें भी कुछ हाथ नहीं लग रहा। Crypto में भी देख लिया ट्रेडिंग कर के, उसमें भी कुछ नहीं हाथ लग रहा हैं। किसी चीज का स्वयं उत्पादन करना हो (manufacturing) तो साला उसमें कमसेकम 50 पेटी (50 लाख) चाहिए, वो अपने पास किधर हैं?!! साला कोई रास्ता ही नहीं बचा क्या, फटाफट ज्यादा पैसा कमाने का...?? फटाफट इसलिए क्योंकि अब मैं 35 का तो हो ही चुका हूं। मेरे हाथ पांव अब ज्यादा से ज्यादा 15 साल चलेंगे। 50 के बाद कुछ तय नहीं हैं आजकल। न जाने कोई बड़ी बीमारी आ गई और मैं किसी अपाहिज की तरह बाकी का जीवन निकालने पर मजबूर हो जाऊं!🤔 इसलिए बेटे जो भी करना हैं वो अब करना हैं, इस वक्त करना हैं। कल किसने देखा हैं?" ये सोचते सोचते वो वापिस सो गया!

7:15 को बीवी ने ज़ोर से चिल्लाते हुवे कहा: "ओ मनन के पापा, उठो.......फिर सो गए क्या? आजकल न जाने क्यों इन्हें ये नई बुरी आदत हो गई हैं?! एक तो बुढ़िया पूरा दिन दिमाग खाएगी ऊपर से उनका ये बेटा बादशाहों की तरह सोता रहेगा...क्या जिंदगी हैं मेरी तो..."

बीवी की कीचकीच शुरू हो गई इसलिए अब सोते रहने से कोई फायदा नहीं हैं। ये सोच कर रणवीर फटाक उठ खड़ा हुआ और सीधा बाथरूम में चला गया। सुबह की दैनिक क्रियाएं खत्म कर के वो चुपचाप घर से निकल गया और काम पे चला गया। 

Blinkit में जिस एरिया में वो काम करता हैं, वो मुंबई का बॉर्डर एरिया हैं: नला सोपारा, नाई गांव, वसई, मीरा रोड, से ले कर बोरीवली तक का करीब 48 किलोमीटर लंबा एरिया। उसके मोबाइल के ऐप में अचानक ऑर्डर पड़ता हैं इसलिए उसे हर वक्त चौकन्ना रहना पड़ता हैं। जैसे ही ऑर्डर का नोटिफिकेशन आए, उस ऑर्डर को स्वीकार कर के तुरंत बाइक की किक लगानी होती हैं, उस स्थान तक। पहुंचने के लिए। समय हमेशा कम ही रहता हैं, इसलिए उसे बाइक को ज्यादातर तेजी से चलाना पड़ता हैं। ट्रैफिक भी सुबह से ही बहुत हो जाता हैं, इसलिए ये एक तरह से जोखिमभरा, कसौटी वाला काम हैं कि इतना ट्रैफिक होने के बावजूद तुम तेजी से बाइक चला के कुछ ही मिनटों में अपने लक्ष्य तक पहुंच जाओ। अगर समय में नहीं पहुंचे तो जो इंसेंटिव होता हैं, वो नहीं मिलेगा। यानि कि मिलने योग्य पैसे, आधे हो जायेंगे। ऐसी खतरों से भरी हुई जॉब फिलहाल वो करने पर मजबूर हैं। 

Blinkit कंपनी ने hotspots (हॉटस्पॉटस) तय कर के रखे हैं, पूरे मुंबई के लिए। हॉटस्पॉट यानी वो इलाका जहां पर आ जाने से आपको ऑर्डर मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती हैं। सबसे ज्यादा ऑर्डर इधर ही आएंगे। डिलीवरी एजेंटों को इन हॉट स्पॉट एरिया के इर्दगिर्द ही रहना हैं, जिससे की वो कमसेकम समय में कस्टमर के पास पहुंच सके। हालांकि मुंबई शहर में अंतर हमेशा ज्यादा ही पड़ता हैं, इसलिए ज्यादातर किसी भी एक ऑर्डर को पूरा करने में कमसेकम 40 से 45 मिनट तो लग ही जाता हैं। ऐसी कठिन जॉब में लगा हुआ रणवीर, आहिस्ता आहिस्ता अपने हॉट स्पॉट _ नाईगांव लोकल स्टेशन पर सुबह 8:15 बजे पहुंचा हैं। 

तभी उसका साथी सुखबीर सिंघ गिल, जो कि इसी कंपनी में काम करता हैं सामने से आता दिखाई दिया। रणवीर अपनी बाइक पर, जो उसने इक चाय की दुकान "रोशन चाय" के  बाजू में खड़ी की थी, उसी पर बैठा हुआ हैं। 

"गुड मॉर्निंग सुखबीर!" रणवीर सुखबीर को बोलता हैं। 

"गुड मॉर्निंग ओ पापे, कि हाल हैं?": सुखबीर।

"बस कुछ नहीं यार। आजकल नींद पूरी नहीं होती। सिर्फ 4 घंटे सो पाता हूं। इसलिए थोड़ा थका हुआ फील कर रहा हूं।" : रणवीर

"मेरा भी वो ही हाल हैं, जी। कल रात को 3 बजे सोया, सुबह सात बजे उठ गया। ये भी कमबख्त क्या नौकरी हैं, यार?! खुद की कोई लाइफ ही नहीं रही साली...😡😡 बस पूरा दिन इधर से उधर, गोल गोल घूमते रहो.." : सुखबीर

"सही बोल रहा हैं...चल टॉपिक बदल...तेरा कुछ सेटिंग ♥️ हुआ की नहीं उस प्रभजोत कौर के साथ...?": रणवीर

"अरे हां यार, कल उसने मिलने को हां बोल दिया हैं! Thank God यार..ये तो कमाल ही हो गया...सच्ची...": सुखबीर

"Wow, that's great news, यार!🙂🙂 Congratulations!!": रणवीर
("वाह बहुत अच्छे समाचार हैं यार! अभिनंदन!": रणवीर)

"वेलकम! चल अब चाय पी लेते हैं।": ये बोल के सुखबीर ने अपनी नई हीरो स्प्लेंडर बाइक को रोशन चाय के बगल में पार्क कर दी। दोनों चाय पी के दुकान से बहार आ गए। करीब 8:35 am का वक्त था। तभी सुखबीर को पहला ऑर्डर मिला, बोरीवली के लिए। यानी एक लंबा 35 किलोमीटर का रास्ता। समय दिया था 55 मिनट। 

सुखबीर चिल्लाया: "अरे मैं कैसे पहुंच पाऊंगा 55 मिनट में यहां से बोरीवली? इन कमबख्तों को कमसेकम 70 मिनट तो देना चाहिए ना? इतना लंबा रास्ता, इतने गड्ढे, और इतना कम वक्त?" ये बोलते बोलते वो अपनी बाइक को स्टार्ट कर के, वहां से रवाना हो गया। 

अभी उसे निकले हुवे करीब 2 सेकंड हुवे होंगे। जैसे ही वो चौराहे को पार कर के सामने के रास्ते की ओर जाने को पहुंचा, तो सामने wrong side से एक टैक्सी आ के उससे टकराई। वो उछल कर जमीन पर गिर पड़ा। रणवीर दौड़ कर उसके पास पहुंचा। उसके बाएं हाथ से खून निकलने लगा था। रणवीर को उस टैक्सी वाले से अभी कोई झगड़ा नहीं करने में ही सयानापन लगा और इसलिए उसने सुखबीर को उठाया और एक दूसरी टैक्सी में डाला। जख्मी हालत में उसे एक नजदीकी अस्पताल में भर्ती कर दिया। 

सुखबीर सिंघ को A+ खून की जरूरत थी। जो कि ईश्वर कृपा से उसे तुरंत मिल गया। शाम होते होते, वो ठीक हो गया। इसी दौरान रणवीर ने सुबह 9 से 10:30 बजे तक और फिर दोपहर 12 से 3:30 बजे तक चीजों की डिलीवरी कर दी। शाम 6 बजे सुखबीर को अस्पताल से रिहा कर दिया गया और रणवीर उसे उसके घर तक रख आया। 

सुखबीर के माता पिता को जब ये पता चला कि उनका इकलौता बेटा बुरी तरह जख्मी हो कर अस्पताल में भर्ती था और रणवीर के कारण वो जल्दी ठीक हो गया हैं, तो दोनों ने रणवीर का बहुत दिल से शुक्रिया अदा किया। सुखबीर की बहन पूनम, जो कि रणवीर को राखी बांधती थी पिछले कुछ सालों से वो भी रणवीर से बहुत अच्छी तरह से पेश आई। सुखबीर के घर से वो शाम 6:45 को निकल गया। 

शाम 7 बजे से वो "रोशन चाय" के बाजू में बैठा बैठा ऑर्डर का इंतजार कर रहा हैं। इस वक्त 8 बजने को हैं। 1 घंटा हो गया पर अब तक एक भी नया ऑर्डर नहीं आया हैं।

रणवीर फिर से खयालों की दुनिया में चला जाता हैं: "एक घंटे से बैठा हूं, पर एक भी ऑर्डर नहीं हुआ। आज अभी तक सिर्फ 6 ऑर्डर हुवे हैं। रात 2 तक और 6 होंगे तो कुल 12 ऑर्डर होंगे और ठीकठाक कमाई हो पाएगी। पर मुझे नहीं लगता की होगी। घरवाली फिर कल सुबह होते ही पैसा मांगेगी! साली, ये जॉब बेकार हैं। एक हफ्ता कर के देखता हूं। वरना भाड में गई ये जॉब। कोई दूसरी जॉब ढूंढ लेता हूं। इसमें कुछ हाथ नहीं आ रहा हैं।" 

वैसे पिछले 5 सालों में वो 8 जॉब बदल चुका हैं! हर नई जॉब में उसे कोई न कोई दिक्कत आ ही जाती हैं। या तो मैनेजमेंट से कोई झगड़ा हो जाता हैं, या उसे वक्त पे तनख्वाह नहीं मिलने की वजह से जॉब छोड़नी पड़ती हैं या फिर कोई नई मुश्किल आ ही जाती हैं। पर अब अगर ये Blinkit वाली जॉब छोड़ दी तो उसे नई जॉब आराम से नहीं मिलने वाली। इसलिए वो एक लोकल अखबार खरीद कर के, उस में जॉब के इश्तहार (advertisement) ढूंढने लगता हैं। 

2 जगह उसे ठीक लगता हैं। सोचता हैं: "कल इन दोनों जगहों पे इंटरव्यू दे देता हूं। फिर आगे देखा जाएगा।" 

उतने में उसे 8:41 pm को ऑर्डर मिलता हैं, बोरीवली वेस्ट का इस बार। फटाक से वो उसे स्वीकार कर के निकल पड़ता हैं। 










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