चाबी _ Chapter 4
सुखबीर सिंघ गील, एक खानदानी सिख घराने का नौजवान, अब एक चोर बनने की कगार पे आ खड़ा हुआ हैं। काफी नौकरियां बदलने का ग़म, हरेक नौकरी में काफी दिक्कतें आने की मुश्किलें, रोज़ सिर्फ 4 घंटे की अपर्याप्त नींद, पैसे की हमेश मौजूद रहने वाली कमी _ इन सभी कारणों से एक अच्छे घर का आदमी, अपने सारे संस्कार, अपनी सारी अच्छाइयां भूल कर एक चोर, एक बुरा आदमी बनने के लिए मानसिक और शारीरिक तौर से अब पूरी तरह तैयार हो चुका हैं। क्या ये हमारे समाज में रह गई कोई क्षति का कारण हैं कि राम का रावण में परिवर्तन होने जा रहा हैं? या फिर ये सुखबीर की निजी कमजोरी? इस सवाल का जवाब तो खैर, केवल वक्त ही बताएगा।
घर से करीब 6:32 को बाइक पर निकला हुआ सुखबीर, करीब 50 किमी प्रति घंटे की औसतन रफ्तार से बाइक चलाते हुवे, वसई से बोरीवली वेस्ट करीब 79 मिनट में पहुंच जाता हैं। उसको कश्यप श्रीवास्तव के घर का exact location (सही लोकेशन) पहले से मालूम हैं। इसलिए उसे कोई दिक्कत नहीं होती उसे ढूंढने में। वो सीधा कश्यप के सफेद बंगले के सामने स्थित पान की दुकान के पास अपनी बाइक खड़ी रखता हैं। घड़ी में 7:53 pm दिखा रहा हैं। एक bristol सिगरेट खरीद के वो उसे फूंकने लगता हैं। बारी बारी वो कश्यप के बंगले की तरफ देख रहा हैं, लेकिन पहले ये चेक करने के बाद की कोई उसे यूं करते हुवे देख तो नहीं रहा? शातिर तो वो हैं ही, अब वो चौकन्ना भी हो चुका हैं।
दो दिन पहले Blinkit ऑर्डर के माध्यम से नया ताला खरीदने वाला कश्यप श्रीवास्तव, अभी भी उस बात से अंजान हैं कि उस ताले के साथ 2 नहीं किंतु 3 चाबियां होनी थी और 1 चाबी उसे मिली ही नहीं थी। वैसे दो दिनों से उसके परिवार में से सारे लोग एक साथ बाहर गए हो ऐसा प्रसंग ही नहीं उत्पन्न हुआ। इसलिए नया ताला लगाने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ी हैं। मगर अब शायद पड़ेगी।
जैसे की पहले बता चुका हूं, उसके पिता श्री रमेशचंद्र श्रीवास्तव, एक बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं। अभी फिलहाल तो वो निवृत जीवन गुजार रहे हैं, पर फिर भी उनकी चौकन्नी और सटीक नज़र से कुछ नहीं बच सकता। रात के 8 बजे का वक्त हैं। डिनर को अभी कुछ देर बाकी हैं। इसलिए वो घर में ही इधर से उधर टहल रहे हैं। उतने में उनकी नजर, ड्रेसिंग टेबल पर रखे हुवे नए ताले पर जाती हैं।
पहले तो वो मुस्कुरा रहे होते हैं कि ताला अच्छा हैं। मजबूत दिख रहा हैं। लेकिन चाबियां? इसके साथ साली चाबियां किधर हैं? कश्यप, उनका बेटा, अभी घर पर नहीं हैं। इसलिए वो उसको फोन लगाते हैं।
"कश्यप बेटा, ये जो नया ताला तूने Blinkit से खरीदा हैं, उसकी चाबियां कितनी हैं और किधर हैं?"
"पिताजी, आप चिंता ना करें। चाबियां मेरे पास ही हैं।"
"हां, लेकिन कितनी चाबियां आई थी इसके साथ? 2 या 3? ये ज़रा देख लेना की जो ऑर्डर में लिखा था उतनी ही चाबियां आई हैं या कम आई हैं। ये इसलिए क्योंकि हमारे घर की एक भी चाबी अगर खो गई और किसी चोर लुटेरे के हाथ आ गई, तो हमारे घर में से काफी बड़े पैमाने पर चोरी हो सकती हैं। हमें करोड़ों का नुकसान हो सकता हैं।"
"आप न जाने इस छोटी सी चीज़ को कहा से कहा ले गए?😃 भला एक चाबी की वजह से किसी को करोड़ों का नुकसान होते हुवे किसी ने देखा हैं क्या? आप भी न, डैड, कभी कभी बाबा आदम के ज़माने की बातें करने लगते हैं। आजकल के मॉडर्न लॉकिंग सिस्टम्स में अब चोरी होने की कोई गुंजाइश ही नहीं रही। आप बेफिक्र हो के खाना खा लीजिए, पिताजी!"
"ठीक हैं, बेटे!" रमेशचंद्र को अब यकीन हो गया की नए ताले के साथ जितनी चाबियां आई थी, 2 या 3, वो अब सुरक्षित हाथों में हैं और उनके घर के ऊपर चोरी का कोई जोखिम नहीं हैं। इसलिए वो चैन से डिनर करने के लिए चले जाते हैं।
उधर कश्यप श्रीवास्तव Blinkit का वो ऑर्डर ढूंढता हैं जिसमें उसने ताला, चाबियां और कुछ सेब मंगवाए थे। वो उसमें दी हुई चाबियों की संख्या ढूंढ ही रहा होता हैं कि उसके दोस्त किशन पटेल का फोन आ जाता हैं। किशन से बात करते करते कश्यप वो भूल जाता हैं कि अभी अभी वो उस माहिती को ढूंढ रहा था कि उस ताले के साथ कितनी चाबियां आई थी। उसे पता ही नहीं की ये छोटी सी गलती उसे कितनी भारी पड़ने वाली हैं।
किशन से बात खत्म कर के कश्यप किसी अन्य काम में लग जाता हैं। उसके sub conscious mind ( अर्धजागृत दिमाग) को इस बार उसने गलत feedback (वापस दी हुई माहिती) दे दी हैं कि चाबियों की संख्या जो भी हो वो already verify हो चुकी हैं (पहले से उसका पुष्टीकरण हो चुका हैं)। इस विषय में फिलहाल चिंता की कोई वजह नहीं हैं और न ही कोई security threat (सुरक्षा की समस्या) के खड़े होने की कोई संभावना हो सकती हैं। "Everything is under my control (सब कुछ इस वक्त मेरे काबू में हैं)" ऐसे सोचता हुआ, वो ऑफिस के अन्य कामों में फ़िर से व्यस्त हो जाता हैं।
रात नौ बजे वो बात वो घर लौट जाता हैं। तब तक उसके पिता खाना खा चुके होते हैं। उसकी पत्नी योगिता श्रीवास्तव और दोनों बच्चों के साथ वो रात 9:15 को डिनर लेता हैं। डिनर लेते वक्त योगिता उसे बताती हैं कि बहार के लकड़े के मुख्य दरवाजे का inbuilt lock (दरवाजे के भीतर ही बना हुआ ताला) खराब हो गया हैं। लेकिन वो टीवी देखने में इतना डूब गया होता हैं कि पत्नी की इस बात वो अनसुनी कर देता हैं।
फिर योगिता उसे बताती हैं "कल इतवार का दिन हैं और सोमवार को भी पब्लिक हॉलिडे हैं। तो बच्चे चाहते हैं कि दो दिनों के लिए क्यों न हम लोग खंडाला लोनावला घूम आए?"
उस पर वो अपना schedule (दैनिक कार्यक्रम सूची) देखता हैं। उसमें कुछ खास नहीं हैं, इसलिए कल और परसों दो दिन के लिए वो कपल बच्चों समेत खंडाला और लोनावला जाने का कार्यक्रम बना लेते हैं। तभी रमेशचंद्र वहां किचन में रखे फ्रिज से कुछ सेब लेने के लिए आते हैं। कश्यप उन्हें पूछ लेता हैं, कि वो खंडाला आना चाहेंगे या नहीं। पिताजी भी बड़ी खुशी खुशी हां बोल देते हैं। अचानक से ही दो दिनों की छुट्टियों का मस्त कार्यक्रम का आयोजन हो जाता हैं!
योगिता, कश्यप, बच्चे और पिताजी _ सारे के सारे अब बहुत खुश हैं! ऐसा लग रहा हैं मानो खुशी की एक ताज़ी लहर उनके घर में उड़ने लगी हो!!😇 घर में पांच सदस्य हैं और ऐसा बहुत अरसे के बाद हुआ हैं कि सभी पांच सदस्य आज एक साथ खुश दिखाई दे रहे हैं!!!😇😇😇
"हां, तो ये बात तय हो गई...कल सुबह हम जल्दी 6:30 को ही घर से निकल जाएंगे। यहां से अपनी कार में करीब दो घंटे में हम लोग पहले लोनावला पहुंचेंगे। वहां की सारी अच्छी जगहों को पूरा दिन देखेंगे। फिर उसी रात को हम खंडाला में अच्छे से होटल में डिनर करेंगे। और फिर किसी 5 star होटल में रात गुजारेंगे। अगले दिन हम खंडाला की देखने लायक जगहों पे घूमेंगे। रात को वही पे जल्दी डिनर खत्म कर के करीब 10:30 से 11 pm को हम लोग यहां वापस बोरीवली पहुंच जायेंगे। ठीक हैं, होम मिनिस्टर योगिता जी?😊😊"
"हां, ठीक हैं! बिल्कुल सही प्लान बना डाला हैं प्रधान मंत्री कश्यप श्रीवास्तव साहब ने आज तो! क्या बात हैं!!"🤔 😀😀😀 जैसे ही योगिता हंसती हैं, बच्चे और पिताजी भी हंसने लगते हैं। पूरा घर हंसी के फुहारों से मानो झूम उठता हैं....😊😇😇🥳🥳🥳
कश्यप को इस खुशी में ये नहीं पता रहता कि उसके बड़े से किचन के बाहर की खिड़की खुली छूट गई हैं। उसका चौकीदार रामू सबसे बहार वाला लोहे का दरवाजा यूं ही खुला छोड़ के कहीं इधर उधर चला गया हैं और एक अंजान शख्स खिड़की से उनकी ये सारी बातें चुपचाप सुन रहा हैं। वो शख्स और कोई नहीं सुखबीर सिंघ गील हैं!
सुखबीर, वाटर फिल्टर घर घर जा के बेचने वाला नकली सेल्समैन बन के उधर करीब 10 मिनट पहले आया था। पर जब उसने लोहे का मुख्य दरवाजा खुला पाया और वो भी बिना किसी चौकीदार के, तो उसकी हिम्मत एकदम बढ़ गई। उसे मालूम था कि डिनर का वक्त हैं इसलिए घर के सारे सदस्य किचन के विशाल कक्ष में ही होंगे। "क्यों न मैं उस किचन वाली खिड़की के पास ही खड़ा रह जाऊं?! हो सकता हैं कोई अच्छी सी जानकारी प्राप्त हो जाए, जो की मुझे मेरे लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कर दे!!" ये सोच कर वो उस खिड़की के एकदम नजदीक जा कर सुनने की कोशिश करता हैं। उसकी खुशी का तब कोई ठिकाना नहीं रहता जब उसे मालूम पड़ता हैं कि पूरा खानदान छुट्टियों को मनाने के लिए कल से अगले दो दिनों तक खंडाला और लोनावला जा रहा हैं। उसे अब अपना प्लान सफल होता हुआ साफ दिखाई देने लगता हैं। खुशी के मारे उसके दिल की धड़कने तेज़ हो जाती हैं; सांसें भी तेज़ हो जाती हैं। लेकिन फिर भी वो खुद पर काबू पा के एकदम शांत रह कर, खिड़की से घर के अंदर झांक रहा हैं। सारी बातें चुपचाप सुन रहा हैं।
जब उसे लगा की डिनर अब खत्म होने को हैं और वैसे भी उसने सारी महत्वपूर्ण बातों को तो सुन ही लिया हैं, तो वो दबे पांव जल्दी जल्दी लोहे के दरवाजे की ओर भागता हैं। चौकीदार रामू अभी तक वापस नहीं आया। वो मुख्य दरवाजे से निकलने ही वाला हैं कि उसकी नजर ऊपर लगे हुवे CCTV कैमरे पर पड़ती हैं। कैमरा ठीक उसके सामने ही देख रहा होता हैं! वो इस बात को नोटिस कर लेता हैं कि अगर वो CCTV कैमरा अभी चल रहा हैं तो उसमें उसका चहेरा अबतक तो आ चुका हैं। अगर पुलिस केस हुआ तो उसकी शक्ल कैमरे में साफ दिखाई देगी और पुलिस उसे कैसे भी ढूंढ लेगी। इसलिए वो थोड़ा निराश हो जाता हैं। इसी निराशा में वो वहां से आगे चलता हुआ फिर उस पान की दुकान पर पहुंच जाता हैं, जहां से उसने सिगरेट खरीदा था।
नकली सेल्समैन बना हुआ सुखबीर पान वाले से बात शुरू करता हैं: "भैया, एक ओर सिगरेट देना, bristol..."
Bristol के कश लगाते हुवे वो पान वाले से पूछता हैं: "मैं Water purifier सिस्टम और CCTV कैमरे बेचता हूं घर घर जा के... आपको इनमें से कुछ लेना हैं??"
"नहीं साब...हम ठहरे एक छोटे आदमी...हमारे बस की बात नहीं हैं ये..."
"ठीक हैं।": सुखबीर
पानवाला: "हां सामने जो सफेद बंगला हैं... श्रीवास्तवजी का ... उसमें दो दो सिक्योरिटी कैमरा रखे हुवे हैं.. लेकिन एक भी चल नहीं रहा ऐसा कुछ दिनों पहले उनके बेटे मुन्नू ने मुझे बताया था जब वो इधर 5 star चॉकलेट लेने आया था .. और आश्चर्य की बात देखिए, इतने अमीर आदमी को फुर्सत ही नहीं मिल रहीं कि वो इन 2 कैमरों को ठीक करवाए!!"
ये सुन के तो सुखबीर के सुख का कोई ठिकाना नहीं रहता!!! उसका मन अब बावरा हो चुका हैं! अंदर ही अंदर उछलने लगा हैं!🥳 उसकी
"मुझे उस बंगले से क्या लेना देना, भैया? वैसे भी मुझे नहीं लगता की वहां पे किसी को Water purifier या CCTV कैमरे को खरीदने में कोई दिलचस्पी होगी। फिर भी आपका धन्यवाद!" ये बोल के सिगरेट के पैसे चुका के, सुखबीर वहा से चलता बना।
बाइक पर फिर से उसने 51 किलोमीटर का सफर 85 मिनटों में तय किया और अपने वसई वाले घर में आ गया। घर पहुंचा तो वक्त हो गया था 11:36 pm पूनम और पिताजी दोनों सो गए थे। उसने चाबी से घर का अंदर से बंध किया हुआ लोक खोल लिया।और एकदम बिल्ली की तरह बिना कोई आवाज किए, दरवाजे को अंदर से फिरसे लोक कर के अपने कमरे की ओर चल दिया। उसे लगा की घर में किसी को उनके आने की खबर नहीं हुई हैं। पर पूनम को मालूम पड़ गया हैं। तुरंत दीवार पर लटक रही घड़ी की तरफ देखती हैं। रात के 11:38 का वक्त हो चुका हैं। वो सोचती हैं: "अभी आता हु 2 घंटे में ऐसा कह कर भैया करीब पौने सात को निकले थे। अभी पौने बारह बज रहा हैं। यानि पूरे 5 घंटे हो बहार घूम रहे थे बाइक पर, इधर से उधर! वो भी बिना उनका रोज का काम किए हुवे। आखिर वो कर क्या रहे हैं, आजकल? खैर छोड़ो जो भी हो ... मुझे मालूम हैं कि मेरा भाई कभी भी कोई गलत काम नहीं करेगा..." इतना सोचते सोचते वो सो गई। उन दोनों के पिताजी भी कब के सो चुके थे। जाग रहा था तो सिर्फ एक शख्स _ सुखबीर सिंघ गील....!
सुखबीर बहार से आ के सीधा अपने बिस्तर पर लेट जाता हैं। "क्या सफल मुलाकात रही ओ कश्यप, तेरे बंगले की..." उसे पता हैं कि उसके कमरे का दरवाजा उसने अंदर से लोक किया हैं इसलिए बहार कोई छोटी आवाज नहीं जाने वाली। इसलिए वो थोड़ा ऊंचे वॉल्यूम में अपने आप से बाते करना शुरू करता हैं: "ओ कश्यप श्रीवास्तव, मैं तुझे बोल रहा हूं...तेरे बंगले की मेरी...इस सिख की मुलाक़ात तो काफी सफल और दिलचस्प रही बे ...! तू कल खंडाला जा रहा हैं परिवार समेत, सुबह 6:30 को, दो दिन वही रहेगा..तेरे अंदर के दरवाजे की चाबी कल सुबह तक मेरे पास होगी। तेरे बाहर के दरवाजे के पास बैठा हुआ चौकीदार एकदम बिंदास बेपरवाह आदमी आदमी हैं, आधा आधा घंटा गुम हो जाता .. तेरे दोनों CCTV कमरे भी नहीं चल रहे ..! क्या बात हैं, क्या बात हैं, कश्यप जी...!!! आपने तो जैसे हमें खुला न्योता ही दे दिया हैं! कि भाई सुखबीर पापे, आजा लूंट ले मेरे इस बंगले को ....😀😀😀😀 अंदर से जितना निकाल सके निकाल ले...😀😀😀😀...अंब कोई माई का लाल रोकने वाला नहीं हैं इस सुखबीर को.. तेरे घर के माल को साफ करने से...क्या मौका दिया हैं, कश्यप तूने तो...क्या मौका दिया हैं....😀😀😀😀😀"
"लेकिन साला उस चौकीदार का क्या करेंगे? और चोरी करने जाऊंगा कब? चौकीदार साला अगर वफादार निकला अपने मालिक से तो सारा प्लान चौपट हो सकता हैं। इसलिए उसके साथ कोई समझौता करने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। इसलिए या तो उसे बेहोश करना होगा या फिर अगर वो मेरा सामने करने की कोशिश करे तो उसे मार देना पड़ेगा। दो में से एक ही होगा, हां... हां अगर वो सो रहा होगा तो उसे सोने दूंगा और मैं अंदर घुस जाऊंगा..."
"मगर अगर वो जाग रहा हैं और पहरा दे रहा हैं, तो पीछे से आ के न..मैं उसका गला घोंट दूंगा...बात खत्म, फिर साले को वही उसकी कुर्सी पर सीधा बैठा के उसी की टोपी उसके मुंह पे ढंक दूंगा जिससे की आने जाने वालों को यूं लगे कि ये बंदा तो सो रहा हैं। कल रात 1 बजे मैं बंगले में घुसूंगा और जितनी जल्दी हो सके ज्यादा से ज्यादा माल उठा के वहां से फरार हो जाऊंगा। फिर चर्च गेट में आए हुवे क्रिकेट मैदान पर आऊंगा। वहां गड्ढा खोदूंगा रात 3 के आसपास और उस गड्ढे में सारा माल डाल दूंगा...सिवाय के कुछ जेवरात, इत्यादि...साथ में एक पिस्तौल और एक लंबा सा चाकू भी रखूंगा, जो मुझे किसी मुठभेड़ में साथ देंगे। बस, कैसे भी कर के मैं अपने इस मिशन को पूरा करके रहूंगा, जो भी विघ्न मेरे रास्ते में आएगा उसे नष्ट कर दूंगा..फिर चाहे वो इंसान हो या जानवर...मेरा अब एक ही लक्ष्य हैं _ कश्यप श्रीवास्तव के घर को पूरी तरह से लूंट लेना.....बस और कुछ नहीं चाहिए अब मुझे...." इतना बोल के उसने एक लंबी सांस ली और वो सो गया।
उधर रणवीर पिछले कई घंटों से Blinkit की डिलीवरी करने में मशरूफ हैं। रात के 2 बजते ही वो घर की तरफ निकल पड़ता हैं। 2:13 को वो घर में प्रवेश करता हैं। रोज़ की तरह हाथ मुंह धो के, ईश्वर स्मरण कर के वो सोने की तैयारी कर ही रहा होता हैं कि उसके दिमाग में एक बात आती हैं: "वो चाबी तो सही सलामत हैं ना, मेरे थैले में? लाओ चेक कर लेता हूं।" सीधा वो थैले की तरफ जाता हैं। उसके दोनों खानों में चेक करता हैं लेकिन चाबी तो गायब हैं!!!😳😳
उसे याद आता हैं कि सुखबीर के साथ हाथापाई हुई थी। उस मुठभेड़ में सुखबीर हार तो गया था, लेकिन बाद में ये बोलने लगा था कि वो मेरी नियत का इम्तिहान ले रहा था! फिर वो मुझे एकदम से गले लग गया था और मैंने उसे अपना छोटा भाई मानते हुवे करीब करीब 1 मिनट तक अपने गले से चिपकाए.. अरे, याद आया...तब ये थैला मेरे पीछे पड़ा हुआ था...तो कहीं ऐसा तो नहीं कि मुझे गले लगाने के बहाने सुखबीर ने ही इस थैले के किसी एक खाने में रखी हुई वो चाबी निकाल ली?...ऐसा हो सकता हैं, रणवीर...बल्कि मैं तो कहता हूं ऐसा ही हुआ हैं....सुखबीर ने ही वो चाबी निकाल ली हैं... तो अब उसका इरादा क्या हैं? क्या वो चोरी करने वाला हैं कश्यप श्रीवास्तव के घर में? हे प्रभु, ऐसा मत करने देना उस सुखबीर को...क्योंकि अगर वो इस तरह चोरी करने में सफल हो भी गया तो भी वो जरूर पकड़ा ही जाएगा और मैं नहीं चाहता कि मेरा प्यारा सुखबीर जेल यात्रा करे। हे प्रभु, उसे सद्बुद्धि देना...!"
वो ये सब सोच ही रहा था कि उसके मोबाइल में सुखबीर का ही फोन आ गया। "सुखबीर का फोन रात को पौने तीन बजे? क्या बात हैं...वो किसी मुश्किल में तो नहीं फंस गया? चलो देखता हूं.." ये सोच के वो उस फोन को उठा लेता हैं।
सामने से सुखबीर की आवाज आती हैं: "ओए रणवीर पापे...मुझे मालूम था कि तू अभी तक जाग रहा होगा ...इसलिए तुझे फोन किया...अब सुन...वो तेरी चाबी मेरे पास रह गई हैं हां..."
रणवीर: "कौन सी चाबी?"
सुखबीर: "अरे वो? जिसके लिए हम दोनों में थोड़ी सी फाइट हो गई थी, यार..😀😀" पता नहीं वो मेरी जेब में कैसे पहुंच गई...अभी अभी तो देखा मैंने...तुरंत मुझे एहसास हुआ की ये तो भाई रणवीर की हैं तो उसी को लौटा देनी होगी मुझे...इससे पहले की हो कुछ आगे पीछे की सोचने लगे...😀😀.. कल दोपहर रोशन चाय की दुकान पर मैं तुझे वो दे दूंगा...ठीक हैं? और फिर तुझे उसका जो करना हैं वो कर लेना..."
रणवीर: "ठीक हैं.."
सुखबीर: ओके पाजी... सतश्री अकाल जी...गुड नाइट जी...
रणवीर: गुड नाइट
ये कह कर रणवीर ने वो फोन काट दिया। वो अब सोच में पड़ गया कि आखिर हो क्या रहा हैं। वो चाबी उसके पीले थैले के एक खाने में थी तो वहां से सुखबीर के पास कैसे आ गई!? जाहिर सी बात हैं कि वो उड़ के तो नहीं पहुंची होगी उसके पास...साले ने खुद बड़ी चालाकी से मुझे गले लगाने का नाटक किया और उसी वक्त वो चाबी मेरे थैले से निकाल ली...ये ही हुआ हैं...अब अगर इसमें मैं सही जा रहा हूं तो कल या परसों वो जरूर कश्यप श्रीवास्तव के घर में चोरी की कोशिश करेगा। साला खुद तो मरेगा, मुझे भी मरवाएगा क्योंकि Blinkit का वो ऑर्डर जिससे ये चाबी जुड़ी हुई हैं, वो मैंने डिलीवर किया था। इसलिए पुलिस मेरे घर तक भी आएगी पूछताछ के लिए...😡...ये कमबख्त सुखबीर मेरा दोस्त हैं या दुश्मन?
कल अब कैसे भी कर के मुझे उसे उस चाबी का इस्तेमाल करने से, श्रीवास्तव जी के घर में चोरी करने से रोकना ही होगा...कैसे भी..." इतना सोचते सोचते रणवीर सो गया...
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