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Showing posts from December, 2025

चाबी _ Chapter 5

आखिर वो दिन आ ही गया, जब सुखबीर ने चोरी करने का प्लान बनाया था _ रविवार का दिन, छुट्टी वाला दिन...आज कश्यप श्रीवास्तव अपने परिवार को ले कर खंडाला लोनावला जाने वाला हैं। उनकी गैर_मौजूदगी  में सुखबीर सिंघ गील उसके घर चोरी करने वाला हैं। और सुखबीर का दोस्त रणवीर भट्ट उसे उस चोरी से रोकने की कोशिश करने वाला हैं। आइए देखते हैं इन तीनों महानुभावों में से कौन सफल हो पाता हैं और कौन सफल होने के सिर्फ ख्वाब देखते रह जाता हैं!! सुबह 4 बजते ही योगिता कश्यप श्रीवास्तव उठ खड़ी हुई। भगवान गणेश को माथा टेक कर वो सीधा किचन में गई। अचानक उसकी नजर उस खिड़की की तरफ गई जो रात को खुली रह गई थी। वो जैसे ही उसे बंध करने गई तो उसकी नजर आधे जले हुवे सिगरेट के टुकड़े की तरफ पड़ी जो नीचे घास पे पड़ा हुआ था। वो सोचने लगी: " आधा जला हुआ सिगरेट का टुकड़ा?? कौन आया होगा इस खिड़की के पास? कश्यप तो सिगरेट नहीं पीता कभी भी। शायद रामू ने फिर से सिगरेट पीना शुरू किया होगा। सुबह को पूछ लेती हूं, कार में बैठूंगी न, तब..."  फिर वो नित्य क्रम में जुट गई। ब्रश कर लिया, वॉशरूम जा के आई, नहा भी लिया...फिर नाश्ता तैयार...

चाबी _ Chapter 4

सुखबीर सिंघ गील, एक खानदानी सिख घराने का नौजवान, अब एक चोर बनने की कगार पे आ खड़ा हुआ हैं। काफी नौकरियां बदलने का ग़म, हरेक नौकरी में काफी दिक्कतें आने की मुश्किलें, रोज़ सिर्फ 4 घंटे की अपर्याप्त नींद, पैसे की हमेश मौजूद रहने वाली कमी _ इन सभी कारणों से एक अच्छे घर का आदमी, अपने सारे संस्कार, अपनी सारी अच्छाइयां भूल कर एक चोर, एक बुरा आदमी बनने के लिए मानसिक और शारीरिक तौर से अब पूरी तरह तैयार हो चुका हैं। क्या ये हमारे समाज में रह गई कोई क्षति का कारण हैं कि राम का रावण में परिवर्तन होने जा रहा हैं? या फिर ये सुखबीर की निजी कमजोरी? इस सवाल का जवाब तो खैर, केवल वक्त ही बताएगा। घर से करीब 6:32 को बाइक पर निकला हुआ सुखबीर, करीब 50 किमी प्रति घंटे की औसतन रफ्तार से बाइक चलाते हुवे, वसई से बोरीवली वेस्ट करीब 79 मिनट में पहुंच जाता हैं। उसको कश्यप श्रीवास्तव के घर का exact location (सही लोकेशन) पहले से मालूम हैं। इसलिए उसे कोई दिक्कत नहीं होती उसे ढूंढने में। वो सीधा कश्यप के सफेद बंगले के सामने स्थित पान की दुकान के पास अपनी बाइक खड़ी रखता हैं। घड़ी में 7:53 pm दिखा रहा हैं। एक bristol सिग...

चाबी _ Chapter 3

 रात के 4:15 बजे रणवीर को सपने में कोई बोलता हुआ सुनाई देता हैं: "बेटे, कल तेरे सच्चाई के रास्ते पर चलने की अग्निपरीक्षा हैं। मैंने जो तुझे शिक्षा दी थी उसे भूलना मत। गलत रस्ते पे मत निकल जाना, मेरे बेटे!" सपने में उसे अपनी प्यारी प्यारी मां दिखाई देती हैं, जवान जैसे वो 30 साल की उम्र में दिखती थी वैसी। बालों में उसने रातरानी के सफेद फूल डाले हुवे हैं। उसका गोरा रंग अंधेरे में रखे हुवे दीपक की भांति चमक रहा हैं। उसके सुंदर नैन जैसे उसको एकदम छोटा 2 साल का बालक बनने को, उसकी गोद में खेलने को मजबूर कर रहे। चाहे वो सपना ही क्यों न हो, लेकिन बहुत ही मनभावन, मन को लुभाने वाला सपना हैं!! "कौन हैं? कौन हैं? मां? तुम? तुम कहां चली गई हो? मैं तुम्हारे बिन, देखो ना, कितना अकेला हो गया हूं, मेरी मां! वापस लौट आओ ना मां! क्या तुम वापस नहीं आ सकती मेरे पास, अपने अकेले बेटे के पास? कहीं ऐसा न हो कि तेरा ये बेटा तेरी जुदाई के ग़म में, इस संसार की उधेड़ बुन को सुलझाने में, कहीं सही रस्ते से भटक ना जाए, कोई गलत रास्ता इख्तियार न कर ले...मुझे रास्ता दिखाओ मां...!" : वो सपने ने अपनी मा...

चाबी _ Chapter 2

कश्यप श्रीवास्तव बोरीवली वेस्ट में रहता हुआ एक अमीर बाप का बेटा हैं। एक बड़े बंगले में वो अपने पिताजी के साथ रहता हैं। MIDC में उसकी खुद की दो फैक्टरियां हैं।इसके अलावा उसकी एक 5 स्टार होटल अंधेरी में हैं और दो और फैक्टरियां पुणे में हैं। करोड़ों की जायदाद का इकलौता वारिस हैं।  मां सुभद्रा देवी को परलोक सिधारे 2 साल हो गए हैं। पिता रमेश श्रीवास्तव अभी निवृत्त जीवन बीता रहे हैं। कश्यप की उमर 32 साल हैं और वो अपने समग्र परिवार के साथ एक शानदार बंगले में जी रहा हैं।  सुबह को पिताजी ने उसे बोला था कि घर के main gate (मुख्य दरवाजे) का ताला गुम हो गया हैं तो बहार से वो नया ताला ले आए। पर वो इस बात को भूल गया। इसलिए उसने Blinkit के माध्यम से 1 बड़ा ताला और कुछ सेब मंगवाए हैं। उसका यह ऑर्डर जा के रणवीर के खाते में पड़ता हैं। रणवीर 8:41 को नायगांव से बोरीवली जाने को निकलता हैं। 9:36 को वो बोरीवली वेस्ट में स्थित कश्यप श्रीवास्तव के घर पहुंच जाता हैं और सफाई से डिलीवरी कर देता हैं। कश्यप उसका शुक्रिया अदा करता हैं और वक्त की पाबंदी के लिए उसे 5 में से 5 रेटिंग भी दे देता हैं।  6 ऑर...

चाबी _ Chapter 1

Chapter 1 सुबह के सात बजते ही रणवीर भट्ट के अलार्म की घंटी बज उठी हैं। Blinkit की होम डिलीवरी खत्म कर के वो रात 2 बजे घर आया था, और थका हारा 2:45 को सो गया था। 4 घंटे की छोटी सी नींद उसके स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं हैं, फिर भी दो पैसा कमाने के लिए, 6 लोगों के परिवार को दो वक्त की रोटी देने के लिए, पिछले पंद्रह दिनों से वो सिर्फ 4 घंटे सो रहा हैं।  दिन में 16 से 17 घंटे वो होम डिलीवरी का काम कर रहा हैं, Zomato की सिस्टर कंपनी Blinkit में, एक डिलीवरी एजेंट की हैसियत से। सुबह को 8 से 10, फिर दोपहर को 12 से 3:30, और फिर शाम को 7 से रात के 2 बजे तक वो पूरे शहर में अपनी बाइक के ऊपर, ऑर्डर के हिसाब से होम डिलीवरी में जुटा हुआ हैं, तब जा के उसके हाथ में कुछ 25,000₹ आता हैं। मुंबई शहर के वसई इलाके में वो रहता हैं और 25,000 उसके परिवार के लिए बिल्कुल काफी नहीं हैं। आए दिन उसकी बीवी उसके पास ज्यादा पैसे मांगती रहती हैं _ कभी बच्चों की स्कूल फीस के लिए, कभी घर के राशन और किराए के लिए तो कभी उसके बुजुर्ग मां बाप की दवाई खर्च के लिए। ऐसे संजोग में उसके परिवार का गुज़ारा बहुत मुश्किल से हो रहा ह...